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दीर्घराज प्रर्साईका रचनाहरु
01 |
हे, भगवान ! मान्छे के हो ? मान्छेहरुको नाङ्गो नाँच किन ?
निबन्ध
दीर्घराज प्रर्साई
11 November, 2008
02 |
राष्ट्रभाषामा किन विवाद -
विचार
दीर्घराज प्रर्साई
26 August, 2008
जम्मा रचना संख्या 2